संस्थापक
प्रबन्धक
प्रधानाचार्यसंस्था का परिचय :
उत्तर प्रदेश के इस पिछड़े इलाके में शिक्षा का ज्योति जलाने का संकल्प सन् 1934 में डिप्टी मो० सईद खाँ ने लिया था। जिसके तहत अन्जुमन इस्लाह मुश्लिम राजपूत कमसार- व- बार दिलदारनगर गाजीपुर संस्था 1940 में रजिस्टर्ड करा कर इस संस्था के तहत अति पिछड़े ग्रामीण क्षेत्र में मुश्लिम राजपूत कालेज की स्थापना किया था । इसके समनान्तर एक अन्य संस्था द्वारा गाँधी मेमोरियल इण्टर कालेज दिलदारनगर का संचालन किया जा रहा था लेकिन वर्ष 1955 में गांधी मेमोरिंयल इण्टर कॉलेज दिलदारनगर को मुस्लिम राजपूत इण्टर कॉलेज में सम्मिश्रित (Amalgamate) कर दिया गया | 1967 में संस्था के संस्थापक के मृत्यु के बाद विद्यालय का नाम उनके नाम जोड़कर सईद कमसार व- बार मुस्लिम इण्टर कालेज (एस. के बी. एम. इण्टर कालेज), दिलदारनगर कर दिया गया है।
संस्था अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमेशा संघर्षरत है तथा इस विद्यालय ने इस क्षेत्र में शिक्षा का अलख जगाने का मजबूत प्रयास करते हुए कामयाबी हासिल की है। जिसके परिणाम स्वरूप इस कालेज ने आई०डी०बी०आई० (I.D.B.I.) के चेयरमैन जनाब एस.एच खान, यू०जी०सी० के मेम्बर जनाब एम० एम० अन्सारी, छत्तीसगढ़ के डी०जी०पी० जनाब एम०डब्लू०.अन्सारी (IPS) मु. अनुलैश खाँ डी०आई०जी० व श्री सीताराम चतुर्वेदी महाप्रबंधक इलाहाबाद बैंक जैसी अनेको इन्जीनीयर्स, डाक्टर्स, प्रोफेसर आदि विभूतियों को पैदा किया। इस क्षेत्र में नवज़वान शारीरिक रूप से पुष्ट एवं अपने कार्य में दक्ष होते हैं। कालेज के छात्र खेल के मैदान में भी अपनी उत्कृष्ट भूमिका निभाते हुए इस कालेज ने ‘सुब्रतो कप’ भी खेला है। इस संस्था की उपलब्धि के तहत हम फक्र के साथ गिना सकते है, कि विगत चार पांच वर्षो से संस्था के छात्र छात्राओं का परीक्षा परिणाम 90%-95% से अधिक रहा है | आज कालेज में इण्टर स्तर पर कला वर्ग, विज्ञान वर्ग, वाणिज्य वर्ग, कृषि वर्ग एवं व्यावसायिक वर्ग संचालित है। इस कॉलेज में बिहार प्रदेश के छात्र-छात्राएं भी पढ़ती हैं |